ये दूरी क्यूँ है ?

[Painting by Donald Zolan] * दिलों के दरमियाँ ये दूरी क्यूँ है ? तुम पास हो, फिर ये मजबूरी क्यूँ है ? बडी जद्दोजहद के बाद घर आये हो, अब आये हो, तो जाना जरूरी क्यूँ है ? ये रात का नशा नहीं तो ओर क्या है, हर सुबह के माथे पे सिंदूरी क्यूँ है ? […]

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नाकामी के जेवर से

ये पूछो क्या-क्या नहीं करते धनी आदमी फेवर से, बागानों को रिश्वत देकर फूल ऊगाते फ्लेवर से । खुश्बु की माफिक चलकर बातें खुद दफ्तर नहीं आती, गैरहाजरी चिल्लाती है ओफिस के स्क्रीन-सेवर से । छोटी-छोटी बातों में तुम क्यूँ हथियार उठाते हो, बात सुलझ जाती है अक्सर सिर्फ दिखायें तेवर से । रामभरोसा क्या […]

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सयाने हो गये

मीतिक्षा.कोम के सभी वाचकों को दिपावली तथा नूतन वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें । आपके जीवन में खुशियों का ईन्द्रधनुष हमेशा बना रहें । * गाँव के किस्से पुराने हो गये, दोस्त बचपन के सयाने हो गये । माँ का पालव ओढने के ख्याल से, मेरे सब सपने सुहाने हो गये । इश्क करने की […]

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याद आती हैं हमे

जुल्फ से हल्की-सी बारिश याद आती हैं हमें, भूल जाने की सिफारीश याद आती है हमें, चाहकर भी जो मुकम्मिल हम कभी ना कर सकें, बीते लम्हों की गुजारिश याद आती हैं हमे * * * आज भी कोई सदा है, जो बुलाती हैं हमें गीत में या फिर गजल में गुनगुनाती हैं हमें वक्त […]

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उम्मीद क्यूँ रक्खे ?

[Painting by Donald Zolan] अगर तुम साथ हो तो ख्वाब की उम्मीद क्यूँ रक्खे ? जवाँ हो रात तो फिर भोर की उम्मीद क्यूँ रक्खे ? अगर तुम ये कहो की हम तुम्हें ना भूल पायेंगे, खुदा के हाथ से फिर भूल की उम्मीद क्यूँ रक्खे ? समजदारी पे पर्दा छा गया जिनकी अदाओं से, […]

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कमाल रखते हैं

किसी भी हाल में चहेरे को हम खुशहाल रखते हैं, तमाचा मारकर भी गाल अक्सर लाल रखते हैं । पसीने को हमारे गर कोई आँसू समज ना लें, बहुत कुछ सोचकर हम हाथ में रूमाल रखते हैं । बुरे हालात हैं, अच्छी खबर की ना हमें उम्मीद, कमी महेसूस ना हो खून की, गुलाल रखतें […]

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आजकल

[Painting by Amita Bhakta] वक्त भी चलते हुए गभरा रहा है आजकल, कौन उसके पैर को फिसला रहा है आजकल ? रास्ते आसान है पर मंझिले मिलती नहीं, हर कोई पत्थर से क्यूँ टकरा रहा है आजकल ? न्याय का दामन पकडकर चल रही है छूरीयाँ, सत्य अपने आपमें धुँधला रहा है आजकल पतझडों ने […]

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गिनाये भी नहीं जाते

हिन्दी में गज़ल लिखनी मैंने अभी-अभी शुरू की है। इस ब्लोग पर हिन्दी में प्रस्तुत की गई यह मेरी प्रथम गज़ल है । यह आपको कैसी लगी ये जरूर बताईयेगा, आपके प्रतिभावों का मुझे इंतजार रहेगा । कई किस्से मुहोब्बत के सुनाये भी नहीं जाते मिले जो घाव अपनों से, बताये भी नहीं जाते उदासी […]

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