कमाल रखते हैं

किसी भी हाल में चहेरे को हम खुशहाल रखते हैं,
तमाचा मारकर भी गाल अक्सर लाल रखते हैं ।

पसीने को हमारे गर कोई आँसू समज ना लें,
बहुत कुछ सोचकर हम हाथ में रूमाल रखते हैं ।

बुरे हालात हैं, अच्छी खबर की ना हमें उम्मीद,
कमी महेसूस ना हो खून की, गुलाल रखतें हैं ।

समय के पास जिनके कोई भी उत्तर नहीं एसे,
हम अपनी आँख में जिन्दा कई सवाल रखतें हैं ।

हर एक लम्हें को बेचैनी है हमको आजमाने की,
पराजित हो न जायें, आँसुओं की ढाल रखते हैं ।

गज़ल तो एक ही पहलू हमारी जिंदगानी का,
बस इतना जान लो, ‘चातक’ कई कमाल रखते हैं ।

– © दक्षेश कोन्ट्राकटर ‘चातक’

COMMENTS (9)
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સમયકે પાસ જિનકે કોઇ ભી ઉત્તર નહીં એસે,
હમ અપની આંખ મેં જિન્દા કઈ સવાલ રખતેં હે
સુંદર ગઝલ.

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बहोत सही बात फरमाई आपने, आप सहीमें बहोत ज्यादा फन के मालिक है,
कमाल तो करते ही है…. अच्छी गझल…!!

કમાલ કર ડાલી !
પસીનેકો હમારે ગર……….હાથમે રુમાલ રખતે હૈ!

ખરેખર સુંદર ગઝલ્….

દક્ષેશભાઈ તમારો કમાલ ગમ્યો…

गज़ल का हर शेअर ही काबिल-ए-दाद
और
काबिल-ए-दीद,

लेकिन इन आशार ने सब का दिल जीत लिया

गज़ल तो एक ही पहलू हमारी जिंदगानी का,
बस इतना जान लो, ‘चातक’ कई कमाल रखते हैं ।

થપ્પડ ખા કર ભી ગાલ અક્સર લાલ રખતે હૈ..વાહ દક્ષેશભાઈ કમાલની ગઝલ

‘चातक’ कई कमाल रखते हैं ।
आपकी हर कमाल पसंद आई !
बहोत बहोत धन्यवाद !

Reply

તમારી હિન્દી ગઝલ માણવાની ગમી!
સુધીર પટેલ.

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समय के पास जिनके कोई भी उत्तर नहीं एसे,
हम अपनी आँख में जिन्दा कई सवाल रखतें हैं ….
ખુબ જ સુન્દર ….

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